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दरबदर पटना

शाम हो चुकी है आप बाइक निकलते हो और चल देते हो कहाँ जाना है कुछ पता नहीं।आम दिनों के अपेक्षा सड़के आज कुछ खली है।फिर भी आप की बाइक तीस चालीस की स्पीड को क्रॉस नहीं कर रही।मन बिल्कुल शान्त है।आप यूँही बिना किसी मंज़िल के बस ड्राइव किये जा रहे हो।गाँधी मैदान के तीन चकर कब लगा दिये आप को पता ही नहीं चला।शायद आप किसी ख्याल में डूबे हुये हो।किस ख्याल में पता नहीं।फिर आप बाइक मोड़ देते हो अशोक राजपथ की तरफ।एक जगह भीड़ देख बाइक को रोक देते हो।खुदा बख्श लाइब्रेरी के सामने होटल पायल के निचे एक ढेले के पास भीड़ लगी हुयी है।आप पास जा कर देखते वो चना भाजी बेच रहा है।रोज ही तो आप इधर से गुजरते हो रोज ही तो आप इस भीड़ को देखते हो पर आज आप बाइक रोक उस तक पहुँच ही गये।आप एक प्लेट आर्डर करते हो और खाने के बाद ही पता चलता है की रोज ये भीड़ क्यों लगती है।वाकयी बहुत ही टेस्टी चना भाजी है।आप फिर बाइक स्टार्ट कर आगे बढ़ जाते हो।फिर बरबस ही आप की बाइक NIT घाट के तरफ मुड़ जाती है।आप घाट के पास पहुंचते हो पर आज तो बहुत ही भीड़ है।  कुछ ज्यदा ही भीड़ है।आप का मन कुंठित हो उठता है।शायद आप मन में आशा कर के आये हुए होते ...

तुम्हारी याद

किसी की कलाई पे बंधी घडी देखते देखते कब क्लास खत्म हो जाता पता ही नहीं चलता था इसलिये कभी अपनी कलाई पे घडी नहीं बांधी। किसी ने इतने प्यार से मेरा मुँह पोछ रुमाल अपने पास रख लिया यह कह कर की यह जिंदगी भर मेरे पास रहेगा की खुद कभी रुमाल रखने की जरुरत महसूस नहीं हुयी। कोई सुबह का अलार्म क्लॉक बन गया।अलार्म घडी बजे न बजे तय समय इनका फ़ोन जरूर आ जाता बिना किसी देरी के हर रोज। तो किसी ने छींक आने पे भी इतने नुस्खे बताये और हिदायते दी की आज भी जुखाम होने पे ठंडा पानी पिने का हिम्मत नहीं करता। सन्डे के अकेलापन में डायरी के कुछ पुराने पन्ने पलट गये। अरुण कुमार यादव

जलेबी कथा

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बात थोड़ी पुरानी है पर बहुत पुरानी भी नही। बस तब ये फेसबुक व्हाट्सएप के चोंचले अभी शुरू नही हुए थे। ऑरकुट नामक परजीवी भी अभी बहुत दूर था। हर हाँथ में अभी मोबाइल नही आया था। लैंडलाइन से निकल कर मोबाइल के दुनिया मे प्रवेश करने का टाइम था। बहुत बाँध लिए भूमिका अब सीधे मुद्दे पर आते है। हैं तो ये समय वो था जब लड़कियों का फ़ेवरिट टाइम पास हीरो हेरोइन का फोटो इकट्ठा करना होता था और लड़कों का क्रिकेटर और WWE वालों का। हमारे क्लास की लड़कियों का सबसे पसंदीदा हेरोइन उस वक़्त काजोल हुआ करती थी। सारी लड़कियों में होड़ लगा रहता था कि काजोल का फ़ोटो सबसे ज्यादा कौन इकट्ठा कर सकता है। लंच का समय था सभी अपना लंच फ़िनिश कर एक दूसरे से बातों में लगे हुए थे। तभी मैं लड़कियों की तरफ मुखातिब होते हुए बोला। पता है कल मुझे एक काजोल का फोटो मिला था। इतना बोलना था कि सभी लड़कियां मेरे तरफ देखने लगी। मैं बोला सोचा तुमलोग के लिए लेते आयूँ पर उसपे जलेबी का रस लग गया था इसलिए नही ला पाया। तभी उधर से एक आवाज आई छिं तुम जलेबी खाते हो? मैंने तो मज़ाक उड़ाने के लिए बोला था पर दांव उल्टा पड़ गया। ऐसी घनघोर बेइज्जती कभी न...