तुम्हारी याद
किसी की कलाई पे बंधी घडी देखते देखते कब क्लास खत्म हो जाता पता ही नहीं चलता था इसलिये कभी अपनी कलाई पे घडी नहीं बांधी।
किसी ने इतने प्यार से मेरा मुँह पोछ रुमाल अपने पास रख लिया यह कह कर की यह जिंदगी भर मेरे पास रहेगा की खुद कभी रुमाल रखने की जरुरत महसूस नहीं हुयी।
कोई सुबह का अलार्म क्लॉक बन गया।अलार्म घडी बजे न बजे तय समय इनका फ़ोन जरूर आ जाता बिना किसी देरी के हर रोज।
तो किसी ने छींक आने पे भी इतने नुस्खे बताये और हिदायते दी की आज भी जुखाम होने पे ठंडा पानी पिने का हिम्मत नहीं करता।
सन्डे के अकेलापन में डायरी के कुछ पुराने पन्ने पलट गये।
अरुण कुमार यादव
Comments
Post a Comment