जलेबी कथा

बात थोड़ी पुरानी है पर बहुत पुरानी भी नही। बस तब ये फेसबुक व्हाट्सएप के चोंचले अभी शुरू नही हुए थे। ऑरकुट नामक परजीवी भी अभी बहुत दूर था। हर हाँथ में अभी मोबाइल नही आया था। लैंडलाइन से निकल कर मोबाइल के दुनिया मे प्रवेश करने का टाइम था। बहुत बाँध लिए भूमिका अब सीधे मुद्दे पर आते है।
हैं तो ये समय वो था जब लड़कियों का फ़ेवरिट टाइम पास हीरो हेरोइन का फोटो इकट्ठा करना होता था और लड़कों का क्रिकेटर और WWE वालों का।
हमारे क्लास की लड़कियों का सबसे पसंदीदा हेरोइन उस वक़्त काजोल हुआ करती थी। सारी लड़कियों में होड़ लगा रहता था कि काजोल का फ़ोटो सबसे ज्यादा कौन इकट्ठा कर सकता है।
लंच का समय था सभी अपना लंच फ़िनिश कर एक दूसरे से बातों में लगे हुए थे। तभी मैं लड़कियों की तरफ मुखातिब होते हुए बोला। पता है कल मुझे एक काजोल का फोटो मिला था। इतना बोलना था कि सभी लड़कियां मेरे तरफ देखने लगी। मैं बोला सोचा तुमलोग के लिए लेते आयूँ पर उसपे जलेबी का रस लग गया था इसलिए नही ला पाया।
तभी उधर से एक आवाज आई छिं तुम जलेबी खाते हो? मैंने तो मज़ाक उड़ाने के लिए बोला था पर दांव उल्टा पड़ गया। ऐसी घनघोर बेइज्जती कभी नही हुई थी। माना कि वो काजू कतली खाने वाले लेवल की थी पर जलेबी कौन नही खाता है यार। जलेबी तो अपना राष्ट्रीय मिठाई है।
खैर बात आई गयी हो गयी। पर दिल मे इस बेइज्जती की एक कसक रह गयी। इसके शायद चार या छः महीने बाद 15 अगस्त था और जलेबी और समोसे बाँटने का जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही था। सबको बाँट दिए थे एक एक बार पर तभी एक हाँथ दुबारा से माँगने के लिए मेरी तरफ बढ़ा। मैंने भी पैकेट उढ़ाया देने के लिए फ़िर वापस खींच लिया। उसने नजरें उढ़ाई मेरी तरफ देखा। दोनों की नजरें मिली मैं मुस्कुरा दिया वो समझ गयी। बदला पूरा हुआ। 😂🤣😂🤣
अरुण कुमार यादव

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